देहरादून: उत्तराखंड के राज्य सहकारी बैंक और जिला सहकारी बैंकों की 290 शाखाओं ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में बेहतरीन वित्तीय प्रदर्शन करते हुए कुल 269.72 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है। कुशल वित्तीय प्रबंधन और सख्त अनुशासन के कारण बैंकों का एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) भी 39.88 करोड़ रुपये कम हुआ है।
सहकारिता मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में बताया कि राज्य सरकार की पारदर्शी नीतियों, डिजिटल बैंकिंग के विस्तार और ऋण वितरण में सुधार के चलते सहकारी बैंकों का प्रदर्शन लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष में लाभ में चल रही शाखाओं की संख्या बढ़कर 290 हो गई है, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 280 थी।
डॉ. रावत ने बताया कि कुल 269.72 करोड़ रुपये के सकल लाभ में से शुद्ध मुनाफा 150.82 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष से 28.96 करोड़ रुपये अधिक है। एनपीए नियंत्रण में भी उल्लेखनीय सफलता मिली है। विगत वर्ष जहां सकल एनपीए 690.11 करोड़ रुपये था, वहीं अब यह घटकर 650.23 करोड़ रुपये रह गया है, यानी 6.22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसी प्रकार शुद्ध एनपीए भी 183.87 करोड़ से घटकर 173.65 करोड़ रुपये रह गया है।
मंत्री ने कहा कि सहकारी बैंकों का यह सकारात्मक प्रदर्शन प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत है। सरकार की सख्त एनपीए वसूली नीति और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से आम लोगों को बेहतर बैंकिंग सेवाएं मिल रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में डिजिटल बैंकिंग, आधुनिक वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता पर और अधिक ध्यान देकर सहकारी बैंकों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत रीढ़ बनाने का प्रयास किया जाएगा।
जनपदवार लाभ की स्थिति में शाखाएं (कुल 290):
- टिहरी : 37
- नैनीताल : 36
- ऊधम सिंह नगर : 32
- चमोली : 30
- कोटद्वार : 29
- अल्मोड़ा : 28
- पिथौरागढ़ : 26
- हरिद्वार : 22
- देहरादून : 21
- उत्तरकाशी : 17
- राज्य सहकारी बैंक : 12
इसके अलावा, प्रदेश की 41 शाखाएं अभी भी घाटे में हैं, जिन्हें लाभ में लाने के लिए अलग से ठोस रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
जनपदवार सकल लाभ (करोड़ में):
- चमोली : 31.79
- टिहरी : 31.12
- कोटद्वार : 30
- देहरादून : 29.11
- ऊधम सिंह नगर : 25.24
- उत्तरकाशी : 25.12
- नैनीताल : 22.65
- पिथौरागढ़ : 21.65
- अल्मोड़ा : 16.91
- हरिद्वार : 9.32
- राज्य सहकारी बैंक : 26.37
यह प्रदर्शन उत्तराखंड में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
