- विज्ञान धाम में शोध, नवाचार और सतत विकास पर हुई चर्चा
- विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए शोधकर्ताओं को सम्मान
देहरादून: हिमालयी क्षेत्र की चुनौतियों का वैज्ञानिक समाधान तलाशने, अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने और विज्ञान को विकास से जोड़ने के संकल्प के साथ आयोजित 21वें उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सम्मेलन का समापन हो गया। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से 25 और 26 अक्टूबर को विज्ञान धाम, देहरादून में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न विषयों पर 261 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें 189 मौखिक और 72 पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल रहीं। समापन समारोह में उत्कृष्ट शोध, नवाचार और वैज्ञानिक प्रस्तुतियों के लिए प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। युवा महिला वैज्ञानिकों, विज्ञान शिक्षा प्रसार तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग के विजेताओं को भी पुरस्कार प्रदान किए गए।
सम्मेलन के समापन सत्र में उत्तराखंड की पूर्व मुख्य सचिव एवं मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी मुख्य अतिथि रहीं। सत्र की अध्यक्षता डॉ. सतपाल सिंह बिष्ट ने की। उत्तराखंड के पूर्व डीआईजी अनिल रतूड़ी, विज्ञान भारती के अध्यक्ष केडी पुरोहित तथा जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान, अल्मोड़ा के निदेशक डॉ. आईडी भट्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
आपदा प्रबंधन से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक पर चर्चा
सम्मेलन के दूसरे दिन विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, नीतिगत विषयों और क्षेत्रीय विकास पर आठ विचार-मंथन सत्र आयोजित किए गए। इनमें हिमालयी आपदा सहनशीलता, साइबर-भौतिक प्रणालियों, STEM शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रक्षा क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, विज्ञान एवं आध्यात्मिकता, विज्ञान संचार और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति-2026 जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इसके अलावा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी, उत्तराखंड में अनुसंधान एवं विकास की स्थिति, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण तथा हिमालयी क्षेत्र के सतत विकास पर भी विचार रखे गए। इन सत्रों का उद्देश्य वैज्ञानिक संस्थानों और सरकारी विभागों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा राज्य की भौगोलिक, पर्यावरणीय और विकास संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण विकसित करना रहा।
विभिन्न विषयों में शोधकर्ताओं को पुरस्कार
कृषि विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान एवं वानिकी की मौखिक प्रस्तुतियों में आस्था जोशी और अब्दुल वारिश को प्रथम स्थान तथा डॉ. ओम प्रकाश तिवारी को द्वितीय स्थान मिला। पोस्टर वर्ग में प्रवीण गुनवंत प्रथम और चंद्रमोहन सिंह द्वितीय रहे।
जैव प्रौद्योगिकी, जैव रसायन एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान में शीतल अलचोनी प्रथम और देव आशीष गिरि द्वितीय रहे। पोस्टर वर्ग में अंशुल गैरोला प्रथम तथा पूजा सिंह द्वितीय रहीं। रासायनिक विज्ञान में पूजा बरगली प्रथम और गरिमा पुनेठा द्वितीय रहीं। पोस्टर वर्ग में आकांक्षा कोटियाल प्रथम तथा गौरव शर्मा द्वितीय रहे।
पृथ्वी विज्ञान में आयुष कुकरेती प्रथम और डॉ. दीप्ति सेमवाल द्वितीय रहीं। अभियांत्रिकी विज्ञान, पदार्थ विज्ञान एवं नैनो प्रौद्योगिकी में विनय रावत प्रथम और प्रभात पंत द्वितीय रहे। गृह विज्ञान, स्वास्थ्य एवं पोषण में सूर्य तेजस्वी देसू प्रथम और मोनिका नेगी द्वितीय रहीं। गणित एवं सांख्यिकी में दिव्यांशु चमोली प्रथम और अंकित अग्रवाल द्वितीय रहे।
चिकित्सा एवं औषधि विज्ञान में संजय टम्टा प्रथम रहे। भौतिक विज्ञान में सुशील चौहान को मौखिक प्रस्तुति में द्वितीय स्थान और पोस्टर वर्ग में राकेश चंद्र जोशी को प्रथम स्थान मिला। ग्रामीण विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं समाज विषय में पाटिल तेजस्विनी धनाजी प्रथम और वाणी श्री द्वितीय रहीं। प्राणी विज्ञान, पशु चिकित्सा एवं पशुपालन में ऋषभ राणा प्रथम तथा ज्योति बिष्ट द्वितीय रहीं। नवाचार के क्षेत्र में श्रेय नैथानी को इनोवेटर ऑफ द ईयर सम्मान दिया गया।
युवा महिला वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों का सम्मान
विज्ञान एवं अनुसंधान में योगदान के लिए युवा महिला वैज्ञानिक पुरस्कार डॉ. खष्टी दसिला, डॉ. अलका पंत, श्रुति सेमवाल और डॉ. विनिता गौरी को प्रदान किया गया। विज्ञान शिक्षा प्रसार सम्मान डॉ. विजेता बिष्ट को मिला।
द्वितीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी प्रीमियर लीग-2026 के जूनियर वर्ग में नैनीताल जिले ने प्रथम, देहरादून ने द्वितीय और ऊधम सिंह नगर ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सीनियर वर्ग में टिहरी गढ़वाल प्रथम, चमोली द्वितीय और उत्तरकाशी तृतीय स्थान पर रहे।
सम्मेलन की मीडिया कवरेज और दस्तावेजीकरण में योगदान के लिए दून विश्वविद्यालय की वर्षा नेगी, रेहाना ज़हरा और शिंजिनी रावत तथा ग्राफिक एरा हिल विश्वविद्यालय के उत्कर्ष यादव और आशाखा दुखाला को सम्मानित किया गया।
सम्मेलन ने शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिक संस्थानों और नीति-निर्माताओं को साझा मंच प्रदान करते हुए राज्य में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और अंतर्विषयी सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
