ऋषिकेश: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के दीक्षांत समारोह में देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने स्नातकों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह केवल वर्षों की मेहनत, अनुशासन और त्याग का परिणाम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति नई जिम्मेदारियों की शुरुआत भी है। उन्होंने छात्रों से अपने पेशेवर कर्तव्यों को समर्पण, संवेदनशीलता और उद्देश्य की भावना के साथ निभाने का आह्वान किया।
ऋषिकेश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे चिंतन और उपचार का वैश्विक केंद्र तथा हिमालय का प्रवेश द्वार बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा परिवेश दीक्षांत समारोह की गरिमा को और भी विशेष बनाता है।
कोविड-19 महामारी के अनुभवों को याद करते हुए नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने संकट के समय लचीलापन, नवाचार और प्रतिबद्धता का परिचय दिया। उन्होंने देश के व्यापक टीकाकरण अभियान और “वैक्सीन मैत्री” पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि यह “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना का प्रतीक है और भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
स्वास्थ्य अवसंरचना के विस्तार पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देशभर में नए एम्स संस्थानों की स्थापना से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और चिकित्सा शिक्षा वंचित क्षेत्रों तक पहुंची हैं। उन्होंने एम्स ऋषिकेश की विशेष सराहना करते हुए इसे नैदानिक देखभाल, शोध, नवाचार और सामाजिक प्रतिबद्धता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। टेलीमेडिसिन, हेलीकॉप्टर इमरजेंसी सेवाएं और ड्रोन के जरिए दवा आपूर्ति जैसी पहलों को उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उपराष्ट्रपति ने क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे, विशेषकर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उल्लेख करते हुए उत्तराखंड सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में समावेशी विकास और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को सराहा।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। उपराष्ट्रपति ने अंत में चिकित्सा पेशेवरों से सहानुभूति, सत्यनिष्ठा और सेवा की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
